शनिवार 4 जुलाई 2026 - 15:39
“लब्बैक सय्यद मुजतबा”; शहीद सर्वोच्च नेता की विदाई समारोह में गूंजने वाला नारा

इस्लामिक गणराज्य ईरान की नींव वली-ए-फ़क़ीह के मजबूत सिद्धांत पर आधारित है, जिसने सर्वोच्च नेता और जनता के बीच एक अटूट संबंध स्थापित किया है। यही संबंध मानवता के शत्रुओं के लिए चिंता का कारण, इस्लामी क्रांति के लक्ष्यों का रक्षक और दुनिया भर के उत्पीड़ितों तथा न्यायप्रिय लोगों के लिए आशा का उज्ज्वल प्रतीक बन चुका है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की राजनीतिक व्यवस्था वली-ए-फ़क़ीह के मजबूत सिद्धांत पर आधारित है, जहाँ नेतृत्व केवल एक प्रशासनिक पद नहीं है, बल्कि जनता और नेतृत्व के बीच आस्था, विश्वास और निष्ठा के गहरे संबंध का प्रतीक है। यही व्यवस्था पिछले कई दशकों से आंतरिक और बाहरी चुनौतियों के बावजूद देश की स्थिरता और स्वतंत्रता की गारंटी बनी हुई है।

शहीद सर्वोच्च नेता की विदाई समारोह में लाखों लोगों की उपस्थिति और “लब्बैक सय्यद मुजतबा” के गूंजते नारों ने एक बार फिर इस जन-समर्पण को स्पष्ट रूप से दिखाया। यह दृश्य इस बात का प्रमाण है कि जनता और वली-ए-फ़क़ीह के बीच का संबंध किसी दबाव, प्रतिबंध या साजिश से कमजोर नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसकी जड़ें धार्मिक आस्था और क्रांतिकारी मूल्यों में गहराई से जुड़ी हुई हैं।

इस मजबूत संबंध ने ईरान को न केवल अपने राष्ट्रीय गौरव और स्वतंत्रता की रक्षा की शक्ति दी है, बल्कि यह दुनिया भर के उत्पीड़ित और न्याय की खोज करने वाले लोगों के लिए भी आशा का केंद्र बन गया है। यही सामूहिक विश्वास और दृढ़ता साम्राज्यवादी शक्तियों के उद्देश्यों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है और उनके कई योजनाओं को असफल कर चुकी है। इसी कारण ईरान आज भी स्वतंत्रता, न्याय और प्रतिरोध के वैश्विक आंदोलनों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण माना जाता है।

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